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10सेकेंड में पता चल जाएगा घर, दुकान में घुसा है चोर

 मात्र 10 हजार रुपए की ऐसी डिवाइस है जो आपके घर में होने वाली हर गतिविधि पर नजर रखेगी। ऐसी डिवाइस जो मात्र 10 सेकेंड में बता देगी कि आपके घर, दुकान में चोर घुसा है। 

मोबाइल पर जानें घर में कौन आया: कंपनी ने डीवीआर एप्लीकेशन तैयार किया है। इसकी कीमत 10 हजार रुपए है। एक डिवाइस को घर में लगे कैमरे लगाएं। घर से बाहर हैं तो इस डिवाइस को इंटरनेट के जरिए मोबाइल या लैपटॉप पर एक्सेस करें और घर पर होने वाली हर गतिविधि पर नजर रख सकते हैं।

सीसीटीवी कैमरे के साथ अलार्म: कंपनी ने एलडब्ल्यू १३क् के नाम से कैमरा तैयार किया है। अगर घर या ऑफिस में संदिग्ध व्यक्ति एंटर करता है तो कैमरा अलार्म भी देगा। इसके अंदर माइक और स्पीकर होने से आप इंटरनेट के जरिए मोबाइल या लैपटॉप पर देख व बात भी कर सकते हैं। कैमरे से छेड़छाड़ करने पर भी अलार्म बजेगा। 

वायरलेस सिक्योरिटी के साथ फायर सिस्टम भी 

यह सिस्टम दुकान, घर या ऑफिस में चोरी या आगजनी की घटना होने पर अलर्ट करेगा। कहीं भी हो यह सिस्टम मात्र 8 सेकेंड में अलर्ट कर देगा। 

कि इंटरव्यू तो अच्छा रहा लेकिन



कई बार हमें लगता है कि इंटरव्यू तो अच्छा रहा लेकिन फिर भी जॉब नहीं मिला। दरअसल, इंटरव्यू के दौरान हम कई आसान सवालों के मुश्किल जवाब दे देते हैं। आइए मुश्किल खड़ी करने वाले ऐसे ही कुछ सवालों और उनके जवाब के बारे में बात करते हैं... 


सीन-1 इंटरव्यू लेने वाला हमसे नौकरी बदलने का कारण पूछता है। तब हम या तो खुद का बचाव करते हैं या कोई बेतुका सा जवाब दे देते हैं। तो क्या कहें? बचाव की बजाय साफ-साफ बताएं कि जॉब बदलना आपकी आदत नहीं है। बल्कि पुरानी कंपनियों में संतुष्ट नहीं थे। अब आप ऐसी कंपनी में काम करना चाहते हैं जहां सैलरी तो अच्छी मिले ही, काम करने के मौके भी ज्यादा हों। 


सीन-2 इंटरव्यू में यह सवाल भी आता है कि आपको नौकरी पर क्यों रखें? आप इस सवाल पर स्ट्रैंथ बता देते हैं। इस जवाब में कोई टेक्निकल फॉल्ट भी नहीं है। लेकिन इसका दूसरा जवाब भी हो सकता है। तो क्या कहें? कहिए-आपका सवाल अच्छा है लेकिन मैं ऑडिशन इंटरव्यू में पार्टिसिपेट करना चाहता हूं। इससे आपको मेरी स्ट्रैंथ के बारे में पता चल जाएगा। ऑडिशन इंटरव्यू में आप जॉब मिलने से पहले काम करके दिखाते हैं। इससे मैनेजर ऑफर लेटर देने से पहले आपकी परफॉर्मेंस को जान जाता है। 


सीन-3 फिर वह पूछता है कि आप इस कंपनी में कब तक रुकेंगे। आप कहते हैं, रिटायरमेंट तक। मगर, आज के माहौल में इस तरह के जवाब पर कोई यकीन नहीं करेगा। तो क्या कहें? आपको कहना चाहिए, 'मैं यहां उस वक्त तक काम करूंगा, जब तक मैं कंपनी में अच्छा परफॉर्म कर सकूं और प्रोफेशनल ग्रोथ मिलती रहे।' 


सीन-4 अंत में वह आपसे सैलरी के बारे में बात करता है। आप उल्टा उससे इस पोस्ट का बजट पूछते हैं। यह गलत तरीका है, जिससे इंटरव्यू लेने वाला इरीटेट हो सकता है। तो क्या कहें? आपसे सैलरी के बारे में सवाल किया जाए तो एक या दो बार इसे टाल दें। मगर, जब अगली बार पूछा जाए तो आप कहें कि मेरी पोस्ट और वर्क प्रोफाइल को देखकर सैलरी तय कर दें।


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Harpreet Singh
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जहां मिट्टी लगाने मात्र से ठीक हो जाता है गठिया रोग!

बुंदेलखंड की धरती पर कई देवी-देवताओं के स्थान हैं और उनसे जुड़ी लोगों की आस्थाएं भी अलग-अलग हैं। इन्हीं में से एक है हमीरपुर जनपद के झलोखर गांव में भुवनेश्वरी देवी का अनूठा स्थान जहां न मंदिर है और न कोई मूर्ति। नीम के पेड़ के नीचे एक भारी-भरकम टीले पर विराजमान इस देवी स्थान के बारे में लोगों का मानना है कि यहां की मिट्टी लगाने मात्र से गठिया रोग ठीक हो जाता है। वैसे तो बुंदेलखंड की सूखी की धरती पर लोकी दाई, हरसोखरी दाई, चिथरी दाई, कथरी दाई, भुइयांरानी, काली दाई, पचनेरे बाबा, बरियार चौरा, कंडहा बाबा, मदना बाबा जैसे सैकड़ों देवी-देवताओं के देवस्थान हैं जिनसे ग्रामीणों की ही नहीं, शहरी लोगों की भी आस्था जुड़ी है। कई ऐसे देवस्थान हैं जिनके बारे में लोगों का मानना है कि यहां आने से विभिन्न गम्भीर बीमारियां ठीक होती हैं। झलोखर गांव के भुवनेश्वरी देवी के टीले पर चढ़ौना के रूप में कोई प्रसाद नहीं चढ़ाया जाता, लेकिन यहां रविवार को भक्तों की भीड़ जमा होती है। ज्यादातर भक्त गठिया रोग से पीड़ित होते हैं। लोगों का मानना है कि एक नीम के पुराने पेड़ के नीचे विराजमान भुवनेश्वरी देवी स्थान के टीले की मिट्टी लगाने मात्र से गठिया बीमारी जड़ से दूर हो जाती है। देवी का पुजारी मिट्टी के बर्तन बनाने वाले कुम्हार बिरादरी से ही नियुक्त करने की परम्परा है। पुजारी कालीदीन प्रजापति ने बताया कि गठिया से पीड़ित दूर-दूर के लोग यहां रविवार को आते हैं। इसी गांव के निर्भयदास प्रजापति ने बताया कि वर्षो पहले गांव के प्रेमदास प्रजापति को देवी मां ने स्वप्न में कहा था कि उनका स्थान मिट्टी का ही यानी कच्चा रहेगा, ताकि गठिया रोग से पीड़ित लोग अपने बदन में इसे लगा कर चंगा हो सकें। सन् 1875 के गजेटियर में कर्नल टाड ने लिखा है कि इस देवी स्थान के पास के तालाब की मिट्टी में गंधक और पारा मौजूद है जो गठिया रोग को ठीक करने में सहायक होता है। बांदा के अतर्रा स्थित राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज एवं चिकित्सालय के प्राचार्य डॉ. एस एन सिंह का कहना है कि मिट्टी में औषधीय तत्व हैं और नीम में तमाम आसाध्य बीमारियों को ठीक करने की क्षमता होती है, यही वजह है कि इस स्थान की मिट्टी लगाने से गठिया रोगियों को फायदा होता है। अतर्रा डिग्री कॉलेज के संस्कृत विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. कृष्ण दत्त चतुर्वेदी बताते हैं कि संस्कृत साहित्य के हिंदी रूपांतरित ग्रंथ 'मां भुवनेश्वरी महात्म्य' के अनुसार यह स्थान उत्तर वैदिककालीन माना गया है और तालाब सूरज कुंड के नाम से विख्यात था। गत रविवार को इस स्थान पर पहुंचे गठिया रोग से पीड़ित सुल्तानपुर की रामश्री, प्रतापगढ़ की रामप्यारी और शाहजहांपुर की भगवनिया ने बताया कि वे यहां तीसरी-चौथी बार आए हैं, उन्हें काफी आराम मिला है। झलोखर गांव के जागेश्वर ने बताया कि यहां लगातार पांच रविवार तक आकर टीले की मिट्टी लगाने से गठिया बीमारी जड़ से खत्म हो जाती है।




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Harpreet Singh
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स्नान करें ठंडे पानी से

 गर्मियों का मौसम स्वास्थ्य की दृष्टि से बड़ा जोखिम भरा होता है। इस मौसम में थोड़ी सी लापरवाही स्वास्थ्य के लिए सिरदर्द बन जाती है, इसके लिए जरूरी है कि हमारे दिन की शुरूआत ठंडे पानी से हो, इससे पूरे दिन ताजगी बनी रहती है। इसके अलावा इससे शारीरिक सौन्दर्य भी बरकरार रहता है। आगर आप भी स्ान के फायदे जानकर उनका लाभ उठाना चाहते हैं तो स्ान करते समय निम्न बातों का अवश्य ध्यान रखें। * गर्मी के दिनों में गर्म पानी से स्ान न करें इससे त्वचा में रूखापन आ जाता है, इसलिए ठंडे पानी का प्रयोग करें। * जिस पानी में साबुन लगाने से झाग नहीं आता ऐसे पानी का प्रयोग न करें यदि विवशता हो तो इसमें तेल आदि का प्रयोग करें या फिर एक कप सिरका, एक मुट्ठी बारिक्स या फिर एक चम्मच जैतून का तेल इसमें डाल लें। इससे पानी का भारीपन कम हो जाता है। * तेल युक्त साबुन, शरीर रगड़ने वाला ब्रुश, बड़ा नरम तौलिया शरीर पर मलने का लोशन व पाउडर का नहाते समय प्रयोग आपके सौन्दर्य में वृध्दि करता है। * बांहों पर भली भांति ब्रुश रगड़ें इससे बाहों में अनावश्यक भारीपन नहीं बढ़ता, वहीं त्वचा के रोम छिद्र भी खुले रहते हैं। *नहाते समय फव्वारे के नीचे शरीर को ढीला छोड़कर खड़े हो जायें या टब में शरीर को ढीला छोड़कर आराम से लेट जायें। * यदि आप गर्मियों के दिनों में भी गरम पानी से नहाने के आदी हैं तो नहाने के बाद पूरा शरीर अच्छी तरह पोंछ लें। इसके बाद पुन: शरीर पर ठंडे पानी के छीटें डाले इससे गरम पानी से त्वचा पर आई खुश्की असर नहीं करती। * अगर नहाने के पानी में कुछ पत्तियां नीम की डाल ली जाये तो आप घमोरियों से बचे रह सकती हैं।


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क्यों खराब है गला

 गला खराब रहना या गले में खराश रहना एक आम समस्या है। गला खराब होना कई अन्य बीमारियों का संकेत देता है जैसे जुकाम शुरू होने या फ्लू होने का संकेत, प्रदूषित हवा, सही खान-पान का न होना, शादी ब्याह में बदपरहेजी करना अधिक ठंडे पदार्थ खाना-पीना और किसी बीमार व्यक्ति के सम्पर्क में रहना गले में खराश और दर्द होने के मुख्य कारण है। इन हालात में गले को आराम देना बहुत जरूरी होता है नहीं तो इसके कारण आप अन्य उलझनों में पड़ सकते हैं। कुछ सरल नुस्खों को अपना कर आप अपने गले की देखभाल कर सकते हैं - - गुनगुने पानी में नमक मिला कर दिन में चार पांच बार गरारे करें। गरारे करने के तुरन्त बाद कुछ ठंडा न लें। गर्म चाय या गुनगुना पनी पिएं जिससे गले को आराम मिलेगा। एक कप पानी में एक चौथाई चम्मच नमक मिलायें। गले में अधिक खराश होने पर विक्स या स्ट्रेपसिल्स की गोलियां चूसते रहें जिससे गले को ठंडक और खराश से राहत मिलती है। दिन में चार गोलियों से अधिक न चूसें। - गले में अधिक दर्द होने पर एक गोली पैरासिटामोल लें ताकि दर्द कम हो जाये। वैसे किसी भी दवा के सेवन से पहले डाक्टर से सलाह अवश्य ले लें। - गले में खराब होने पर स्टीम लेने से भी राहत मिलती है। कमरे को बंद कर हीटर या इलेक्ट्रिक रॉड को पानी की भरी बाल्टी में लगा लें या हीटर पर बड़े बर्तन में पानी भर कर आन कर दें। पानी को खूब उबलने दें ताकि कमरे में स्टीम फैल जाये और यही स्टीम सांस द्वारा अन्दर लेने से गला खुलता है और खराश में राहत महसूस होती है। यह ध्यान रखें कि यदि गले की खराब या दर्द तीन चार दिन तक काबू में न आए तो डाक्टर से जांच अवश्य करवा लें और उनके परामर्श अनुसार दवाइयों का सेवन करें।


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दूध से भी संभव है कुछ रोगों का उपचार

 दूध एक अच्छी खुराक है। शिशु तो पहले-पहले केवल दूध पर निर्भर रहता है। धीरे-धीरे वह फलों के रसों तथा तरल पदार्थ पर लाया जाता है। हमें जीवन भर दूध की आवश्यकता रहती है। केवल पौष्टिकता अच्छी बुध्दि के लिए ही नहीं, अनेक रोगों को भगाने में भी दूध सहायक होता है। * यदि मुंह में, किसी भी कारण से, गर्मी में छाले पड़ जाएं, दिन में तीन बार कच्चे दूध से अच्छी प्रकार गरारे करें। * गाय का दूध उबाल लें। जब यह गुनगुना हो तो हिचकी में एक-एक चम्मच करके पिलाएं। हिचकी ठीक होगी। * गर्मी में खांसी हो तो बकरी का ताजा दूध पिएं। आराम मिलेगा। * गरम दूध पीने से कब्ज नहीं रहता। यदि कब्ज बहुत पुराना व कठोर हो तो बादाम रोगन एक चम्मच डालकर दूध पी लें। * दमे के दौरों से छुटकारा पाने के लिए दूध का सहारा लें। दस दाने मुनक्का लें। इन्हें कूट लें। एक पाव दूध लें। इसमें इतना ही पानी डालें। कुचले हुए मुनक्के इसमें डालें। उबालें। जब दूध एवं पानी की मात्रा आधी रह जाएं तो उतार लें। छानें। आधा तोला बादाम रोगन, एक तोला मिश्री तथा छह दाने काली मिर्च पीस लें। दूध में मिलाएं। यह रोग शांत कर देगा। पीने से सांस ठीक आंखों के अनेक रोगों से छुटकारा पाने के लिए कच्चे दूध को बिलोएं। मक्खन निकालें। अब इसे आंखों में डाले। बड़ा सुख मिलेगा। ड्रापर से डालें। * बच्चों की स्मरण शक्ति बढ़ाने के लिए गाय का दूध पिलाएं। साथ में छोटी इलायची भी खाने को दें। बच्चों की स्मरण शक्ति तीव्र हो जाएगी। * कान में फूंसी होने पर गाय के दूध की बूंदें डालें। आराम पाएंगे। * पेचिश के रोगी को दो-तीन दिन दूध पर रखें। यदि भेड़ का दूध मिल जाए तो एक ही दिन में आराम मिलेगा। * यदि कोई व्यक्ति दस्तों से परेशान हो, आराम न हो रहा हो, उसके लिए एक लीटर दूध उबालें। ठंडा करें। अब लोहे की एक छड़ लें। इसे आग पर गर्म कर लाल करें। चिमटे आदि की मदद से इसे दूध में डालकर ठंडा करें। यह क्रिया सात बार दोहराएं। अब मिश्री या शक्कर डालकर रोगी को पिलाएं। शीघ्र आराम आ जाएगा। * अक्सर नकसीर से परेशान रहते हों तो गधी का ताजा दूध लें।


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सामने आया साइबरवर्ल्ड का सबसे बड़ा वायरस,

मास्को.एक ऐसे साइबर वायरस का पता चला है जो कंप्यूटर पर हमला करके उसे जासूस बना देता है और बिना पकड़ में आए तमाम जानकारियां चुरा लेता है। यह बेहद खतरनाक वायरस पिछले दो साल से साइबर स्पेस में मौजूद था लेकिन इसे हाल ही में पकड़ा गया है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक यह वायरस अब तक के सबसे चर्चित कंप्यूटर वायरस 'स्टक्सनेट' और 'डूकू' से भी खतरनाक है। इस वायरस को सबसे पहले मास्को स्थित केस्परस्काई लैब के सुरक्षा विशेषज्ञों ने पकड़ा है। माना जा रहा है कि इस बेहद खतरनाक वायरस को किसी देश ने बनाया है। केस्परस्काई के विशेषज्ञ एलेक्सेंडर गोस्तोव ने अपने केस्परस्काई की वेबसाइट पर ब्लॉग पर लिखा, 'डूकू और स्टक्सनेट ने मिडिल इस्ट में चल रहे साइबर युद्ध को और भीषण कर दिया था लेकिन अब हमें साइबर स्पेस का सबसे खतरनाक वायरस मिला है।' मास्को में स्थित केस्परस्काई लैब, ईरान की मेहर कंप्यूटर इमरजेंसी रेस्पांस टीम को आर्डिनेशन सेंटर और हंगरी की बुडापेस्ट यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी एंड इकोनॉमिक्स की क्रिप्टोग्रॉफी एंड सिस्टम सिक्यूरिटी लैब ने साइबर हमलों के अध्ययन के दौरान इस ट्रोजन को पकड़ा।फ्लेम, फ्लेमर या स्काईवाइपर नाम का यह ट्रोजन हमला करके किसी भी कंप्यूटर को जासूसी मशीन में बदल सकता है। यह मशीन पर हमला करके उसके नेटवर्किंग ट्रैफिक पर नजर रख सकता है, स्क्रीनशॉट लेकर उन्हें अपने कमांड सेंटर भेज सकता है, कंप्यूटर के माइक्रोफोन के जरिए इसे इस्तेमाल करने वाले व्यक्ति की आवाज रिकार्ड कर सकता है, पासवर्ड चुरा सकता है, कीबोर्ड पर कौन से बटन दबाए जा रहे हैं उन्हें पहचान सकता है, ब्लूटूथ के जरिये कंप्यूटर से अन्य डिवाइस को जोड़कर उनका डाटा डिलीट कर सकता है। इस वायरस के अभी तक सबसे ज्यादा हमले मध्यपूर्व एशिया और अफ्रीका में हुए हैं। ईरान में इसके अब तक 168 हमले हुए हैं। वायरस से नहीं बचाएगी एफबीआई, बंद होंगे लाखों कंप्यूटर ईरान पर हमला हो सकता है 'फ्लेम' का टारगेट मारो या ज़िंदा पकड़ो . 

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नया प्रवेश द्वार

केंद्रीय इंजीनियरिंग संस्थानों में प्रवेश के लिए घोषित परीक्षा की नई व्यवस्था के दो लाभ जाहिर हैं। अब छात्रों को आईआईटी, एनआईटी और अन्य केंद्रीय इंजीनियरिंग कॉलेजों के दाखिला इम्तिहान में हिस्सा लेने के लिए अलग-अलग फॉर्म नहीं भरने होंगे। फिर 2013 से होने वाली संयुक्त प्रवेश परीक्षा में बारहवीं कक्षा में प्राप्त अंको को भी महत्व दिया जाएगा। इससे छात्रों के लिए स्कूली पढ़ाई को गंभीरता से लेना आवश्यक हो जाएगा। दूसरी तरफ छात्रों के मूल्यांकन के लिए ज्वाइंट एंट्रेंस एग्जाम (जेईई) में प्रदर्शन के साथ-साथ अब स्कूली नतीजा भी आधार होगा, जिससे छात्रों की प्रतिभा एवं योग्यता के आकलन की बेहतर स्थिति बनेगी। अब इंजीनियरिंग में दाखिला पाने के लिए छात्रों को स्कूल में बेहतर नतीजा लाना होगा, ऑब्जेक्टिव सवालों के आधार पर होने वाले जेईई-मेन्स में बुद्धिकौशल दिखाना होगा और हालांकि जेईई-एडवान्स्ड का फॉर्मेट अभी तय होना है, लेकिन यही संभावना है कि उसमें ज्ञान की गहराई परखी जाएगी। इन प्रत्यक्ष लाभों के अलावा सभी इंजीनियरिंग कॉलेजों में दाखिले के लिए समान मानदंड लागू होंगे, जो अलग-अलग संस्थानों में इंजीनियरिंग शिक्षा के स्तर को समान रूप देने के लिहाज से महत्वपूर्ण साबित होगा। एक साथ होने वाले टेस्ट में आईआईटी के लिए चुने जाने वाले छात्रों का एक अलग तरीका तय करने में सफलता पा ली गई है। यानी पहले नई परीक्षा व्यवस्था से भारत के इन प्रतिष्ठित संस्थानों के स्तर पर खराब असर पड़ने की आशंकाओं का अब समाधान हो गया है। इसके बावजूद अगर नई व्यवस्था को लेकर किसी स्तर पर कोई शिकायत मौजूद हो, तो सरकार को चाहिए कि वह संवाद से उन्हें दूर करने की कोशिश करे। एक आशंका उन स्कूलों के छात्रों को लेकर है, जो राज्य परीक्षा बोर्डो से जुड़े हुए हैं। कहा गया है कि उनका स्तर सीबीएसई से जुड़े स्कूलों के बराबर नहीं है, जिससे वहां के छात्र नुकसान में रह सकते हैं। अगर ऐसा है, तो उन स्कूलों में पढ़ाई का स्तर सुधारने का अभियान चलाने की जरूरत है। मगर एक अलग स्तर पर कमजोरी एक अच्छी कोशिश को रोकने का बहाना नहीं हो सकती।

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इन दिनों दुखी हैं देश को आपकी जरूरत है

हममें से अनेक लोग, जो शिक्षित और भावुक हैं और अपने देश को प्यार करते हैं, इन दिनों दुखी हैं। हम देख रहे हैं कि हमारा देश सत्ता में बैठे लोगों की लूट और कुप्रबंधन का शिकार हो रहा है। एक तरफ रुपया गिर रहा है और औद्योगिक उत्पादन दर नकारात्मक हो गई है, वहीं दूसरी तरफ हमारा शीर्ष नेतृत्व संसद में साठ साल पुराने काटरून पर बहस कर रहा है। सरकार ने पूरे देश से जिस लोकपाल बिल का वादा किया था, उसकी उम्मीदें धूमिल हो रही हैं। आर्थिक सुधार अब एक विकल्प नहीं, सख्त जरूरत बन चुका है, लेकिन उसे लेकर भी ऊहापोह की स्थिति बनी हुई है। नीति निर्माण अचेत है। कॉलेज ग्रेजुएट्स और इंजीनियरों को वे जॉब भी नहीं मिल रहे, जो उन्हें दैनिक वेतनभोगियों जितना मेहनताना दे पाएं। भारत के इतिहास के सबसे बड़े घोटाले में लिप्त लगभग सभी लोग जमानत पर छूट चुके हैं और कोई नहीं जानता कि उनका दोष कब सिद्ध होगा, या कभी होगा भी या नहीं। लोग अक्सर पूछते हैं कि देश की दशा कैसे और कब बदलेगी? इसके लिए क्या किया जाना चाहिए? भूख हड़ताल, क्रांति, मीडिया स्टोरी, मतदाताओं की
शिक्षा या कोई नया टीवी रियलिटी शो? दुर्भाग्य से इन समस्याओं के कोई आसान जवाब नहीं हैं। अपने ध्वस्त हो रहे सिस्टम को जोड़ने के औजार हमारे पास सीमित संख्या में ही हैं। स्वतंत्र मीडिया इन्हीं औजारों में से है। हमारी न्यायपालिका ने भी अन्याय को उजागर करने में अपना योगदान दिया है। सामाजिक कार्यकर्ताओं का अपना महत्व रहा है तो कलाकारों - फिल्मकारों, लेखकों और संगीतकारों - ने भी अपनी भूमिका का निर्वाह किया है। हर वह व्यक्ति, जो अपनी क्षमतानुसार देश में बदलाव लाने के लिए अपनी ओर से कोई योगदान कर सकता है, कर रहा है। लेकिन एक वर्ग ऐसा है, जो देश की स्थिति बदलने के लिए सबसे महत्वपूर्ण हस्तक्षेप कर सकता है। ये हैं हमारे लोकसेवक और लोकप्रशासक, जिन्हें प्यार से 'बाबू' कहकर पुकारा जाता है। लेकिन दुख की बात है कि इस वर्ग ने अपनी क्षमताओं का उतना उपयोग नहीं किया, जितना वह कर सकता था। देखा जाए तो ये सरकारी अधिकारी और कर्मचारी ही देश को चलाते हैं। देश की प्रशासनिक मशीनरी में हमारे नेताओं की ज्यादा रुचि नहीं रही है। हमारे राजनेता प्रतीकात्मकता पसंद करते हैं, जैसे दलितों के घर भोजन करना, राष्ट्रपति चुनाव या काटरून। या फिर वे वोट बैंक को लुभाने वाले मुद्दों को पसंद करते हैं, जैसे आरक्षण, धर्मस्थलों की स्थापना या राज्यों का विभाजन। लेकिन देश इन लोकसेवकों के कारण ही चल रहा है। रेलवे अधिकारी ही यह सुनिश्चित करते हैं कि ट्रेनें सही समय पर चलें, नगर निगम के पार्षद ही यह सुनिश्चित करते हैं कि हमारी सड़कें साफ रहें, जूनियर आईएएस अधिकारी जिलों का कामकाज संभालते हैं तो सीनियर आईएएस मंत्रालय चलाते हैं। हमारे देश में आमतौर पर सरकारी कर्मचारी को सुस्त, पुरातनपंथी और भ्रष्ट व्यक्ति माना जाता है। हो सकता है, अनेक बाबू इस धारणा पर खरे भी उतरते हों। लेकिन अनेक अधिकारी-कर्मचारी ऐसे भी हैं, जो ईमानदार और मेहनती हैं। मेरे ही कई कॉलेज बैचमेट्स सिविल सर्विसेज में काम करते हैं। वे दिन में १२ घंटे प्रतिकूल परिस्थितियों में काम करते हैं, जबकि वे निजी क्षेत्र में इससे दस गुना अधिक वेतन पर काम कर सकते थे। शायद यह उनका आदर्शवाद है, शायद वे अपने देश को प्यार करते हैं, या शायद वे देश में बदलाव लाना चाहते हैं। वे स्मार्ट लोग हैं। यूपीएससी की परीक्षाएं क्लीयर करना कोई मामूली बात नहीं होती। हमारे लोक प्रशासक सुशिक्षित, मेधावी, प्रभावी और दक्ष होते हैं। लेकिन इसके बावजूद वे उतनी प्रतिष्ठा अर्जित नहीं कर पाते, जितनी कर सकते हैं। और इसकी वजह है : साहस का अभाव। मुझे यह कहते हुए दुख होता है कि तमाम क्षमताओं के बावजूद हमारे अधिकारी साहस का प्रदर्शन नहीं कर पाते। वे अपने राजनीतिक आकाओं से भयभीत रहते हैं, अपने सालाना मूल्यांकन को लेकर चिंतित रहते हैं, अपने प्रमोशन के बारे में जरूरत से ज्यादा फिक्र करते हैं और कभी भी कॅरियर में पिछड़ना नहीं चाहते। उन्हें जॉब सिक्योरिटी पसंद है। वे चाहते हैं कि बिना कोई विलक्षण काम किए उन्हें साल-दर-साल तरक्की मिलती रहे। अगर वे कोई हस्तक्षेप करते हैं, कोई रचनात्मक सुझाव देते हैं या किसी गलत चीज की ओर इशारा करते हैं तो हो सकता है कि उन्हें इसका नुकसान झेलना पड़े। इसीलिए वे अक्सर यथास्थिति बनाए रखना चाहते हैं। नतीजा यह रहता है कि देश के सर्वाधिक मेधावी व्यक्तियों में शुमार, जो सत्ता के गलियारों के निकट हैं और सही-गलत को अच्छी तरह समझते हैं, जरूरत से बहुत कम हस्तक्षेप कर पाते हैं। वे जॉब कर रहे हैं, लेकिन वे बदलाव के लिए लड़ नहीं रहे। उन्हें कुछ बुनियादी सवालों का जवाब देना चाहिए। वे इतने भयभीत क्यों हैं? इसलिए कि उन्हें पदोन्नति नहीं मिलेगी? वे सचिव नहीं बन पाएंगे? वे किसी सरकारी निवास में एक एक्स्ट्रा बेडरूम फ्लैट पाने का मौका गंवा देंगे? यदि वे भ्रष्ट राजनीतिक वर्ग के विरुद्ध आवाज उठाते हैं तो ज्यादा से ज्यादा क्या हो सकता है? शायद वे अपनी नौकरी गंवा बैठें और अपनी छद्म सत्ता खो दें। तो क्या उन्हें अपनी प्रतिभा पर इतना भी भरोसा नहीं है कि वे अन्यत्र अपनी आजीविका चला सकें? महाभारत में कृष्ण ने अजरुन से कहा था कि एक नैतिक लड़ाई में अपने प्रिय परिजनों से युद्ध करना भी धर्म है। हमारी नौकरशाही को विचार करना चाहिए कि आखिर उसका धर्म क्या है। यदि हमारे अधिकारी चाहें तो किसी भी समाजसेवी, कलाकार या मीडियाकर्मी की तुलना में अधिक तेजी से सिस्टम को दुरुस्त कर सकते हैं। वे खुद सिस्टम का हिस्सा हैं और जानते हैं कि कहां पर क्या चल रहा है। वे देश की सबसे ताकतवर लॉबी हैं। यदि वे आंदोलन करेंगे तो सत्ता के गलियारों को सुनने को मजबूर होना ही पड़ेगा। चुप रहकर अन्याय मत सहन कीजिए, बुराई का हिस्सा मत बनिए, क्योंकि आपमें इतनी प्रतिभा है कि आप अच्छाई का साथ देकर भी कामयाब हो सकते हैं। उठिए और संघर्ष कीजिए। देश को आपकी जरूरत है। 
 
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ये हैं दुनिया के पांच सबसे कर्जदार देश

आपको यह जानकार हैरानी होगी की दुनिया के सबसे विकसित देशों में शुमार देश ही दुनिया के पांच सबसे कर्जदार देशों में शामिल हैं दरअसल इन देशों की अर्थव्यवस्था ने कर्ज का लबादा ओढ़ा हुआ है और अब जब यह लबादा फटने लगा है तो इसमें से कंगाली की तस्वीर दिखने लगी है। इनमें से पांच सबसे कर्जदार देश ये हैं- यूनाइटेड स्टेट ऑफ अमेरिका कुल कर्ज- 14.590 ट्रिलियन डॉलर प्रति व्यक्ति कर्ज- $46,929 कर्ज जीडीपी का प्रतिशत- 94% दुनिया का सबसे शक्तिशाली देश अमेरिका दुनिया का सबसे कर्जदार देश है। जो इसकी कुल जीडीपी का 94 प्रतिशत है अमेरिका का कर्ज खतरनाक स्तर तक बढ़ चुका है। अमेरिका पर सबसे ज्यादा विदेशी कर्ज है ब्रिटेन कुल कर्ज- 8.981 ट्रिलियन डॉलर प्रति व्यक्ति कर्ज- 144,338 डॉलर कुल जीडीपी का प्रतिशत कर्ज - 400% ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था एक गहरे आर्थिक संकट में फंसती जा रही है देश का बजट घाटा 156 अरब पाउंड्स तक बढ़ चुका है आर्थिक जानकारों के मुताबिक ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था में आगे गिरावट के आसार हैं। जर्मनी कुल कर्ज- 4.713 ट्रिलियन डॉलर प्रति व्यक्ति कर्ज- 57,755 डॉलर कुल जीडीपी का प्रतिशत कर्ज-142% रईस देशों में गिने जाने वाले जर्मनी की हालत भी अमेरिका की तरह पतली है। जर्मनी का बजट घाटा 2.3 प्रतिशत बढ़ चुका है यूरो जोन के देशों में जर्मनी की आर्थिक हालत भी चिंताजनक बने हुए हैं। फ्रांस कुल कर्ज- 4.698 ट्रिलियन डॉलर प्रति व्यक्ति कर्ज- 74,619 डॉलर कुल जीडीपी का प्रतिशत कर्ज-182% फ्रांस की आर्थिक समस्या प्रतिदिन बढ़ती जा रही है फ्रांस का बजट घाटा 6% के खतरनाक स्तर तक पहुंच चुका है और यहां बेरोजगारी और बेघर लोगों की तादाद लगातार बढ़ रही है। नीदरलैंड कुल कर्ज- 3.733 ट्रिलियन डॉलर प्रति व्यक्ति कर्ज- 225,814 डॉलर जीडीपी का कुल प्रतिशत कर्ज- 471% 2008 में आई आर्थिक मंदी ने इस देश को पूरी तरह झकझोर कर रख दिया था और अभी तक यह उससे उबरा नहीं है और एक बार फिर आर्थिक परेशानी इसके सामने खड़ी है। इससे निबटने के लिए इस देश को कई कड़े कदम उठाने होंगे। Related Articles: बैंकों से अब कर्ज कम ले रहे हैं लोग, ऊंचे ब्याज का असर 110 अरब रुपए के कर्ज तले दबी है ये पाकिस्तानी कंपनी! कर्ज ने निकाला ऑयल कंपनियों का तेल भारत की इन 3 कंपनियों पर है 1 लाख करोड़ का कर्ज! एमटीएनएल ने कर्ज भुगतान के लिए जुटाए 500 करोड़ कर्ज के जाल में फंस गई ये दिग्गज कंपनी, अप संपत्ति बेचने की तैयारी! कर्ज में डूबा अमेरिका और डॉलर के समुद्र में डूबी अमेरिकी कंपनियां .

कोई भी स्‍क्रीन अटैच हो सकने वाला 5000 का कंप्‍यूटर लॉन्‍च

बाजार में अब सस्ते टैबलेट की तरह ही सस्ते कंप्यूटर भी मिलने शुरू हो गए हैं। 5000 रुपये में मिलने वाले इस कंप्यूटर को एक चाइनीज कंपनी ने लॉन्च किया है। इस कंप्यूटर में किसी भी स्क्रीन का अटैच हो जाना इसकी सबसे बड़ी खासियत है। छोटे साइज के इस कंप्यूटर में बड़े कंप्यूटर जैसी लगभग सभी तरह की खासियत मौजूद है। 4.0 वर्जन वाले इस कंप्यूटर में मिनीस्क्यूल ड्राइव और जानदार प्रोसेसर दिया गया है। वहीं इसमें 1 गीगाहर्ट का कार्टेक्स ए8 चिप और 512 एमबी रैम के साथ ही 4 जीबी की इंटरनल हार्ड डिस्क भी मौजूद है। इसके चलते इस कंप्यूटर की स्टोरेज क्षमता भी बेहतर हो जाती है। मिनी कंप्यूटर में वाईफाई, 2.0 यूएसबी पोर्ट, एचडीएमआई पोर्ट के अलावा 32 जीबी तक मैमोरी बढ़ाने की क्षमता है। मिनी कंप्‍यूटर में लगी हुई ऑलविनर ए10 चिप की वजह से माइक्रोएसडी कार्ड को उबंतू और लीनिक्‍स में भी इसे प्रयोग कर सकते हैं। मिनी कंप्‍यूटर के प्रमुख फीचर- 4.0 एंड्रॉएड ओएस 512 एमबी रैम मिनी स्‍क्‍यूल ड्राइव 1 गीगाहर्ट का कार्टेक्‍स प्रोसेसर ए8 चिप माइक्रोएसडी कार्ड स्‍लॉट 32 जीबी एक्‍पेंडेबले मैमोरी 2.0 यूएसबी पोर्ट ए10 चिप Related Articles: सावधान! फेसबुक पर चैटिंग से कंप्‍यूटर को खतरा.

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ਕੁਆਰ ਗੰਦਲ ਦੀ ਖੇਤੀ ਦੇ ਫਾਇਦੇ

ਅੱਜਕਲ ਦੀ ਤੇਜ਼-ਤਰਾਰ ਅਤੇ ਭੱਜ-ਦੌੜ ਵਾਲੀ ਜ਼ਿੰਦਗੀ ਵਿਚ ਅਸੀਂ ਪੈਸਾ ਕਮਾਉਣ ਦੇ ਨਾਲ-ਨਾਲ ਸਿਹਤਮੰਦ ਅਤੇ ਫਿੱਟ ਵੀ ਰਹਿਣਾ ਚਾਹੁੰਦੇ ਹਾਂ। ਇਹ ਵੀ ਚਾਹੁੰਦੇ ਹਾਂ ਕਿ ਸਾਡੀ ਚਮੜੀ ਮੁਲਾਇਮ, ਆਕਰਸ਼ਕ ਅਤੇ ਕੋਮਲ ਬਣੀ ਰਹੇ। ਜੇਕਰ ਅਸੀਂ ਆਪਣੀ ਰੋਜ਼ਾਨਾ ਦੀ ਜ਼ਿੰਦਗੀ ਵਿਚ ਕੁਆਰ ਗੰਦਲ ਦਾ ਉਪਯੋਗ ਕਰੀਏ ਤਾਂ ਇਹ ਸੰਭਵ ਹੋ ਸਕਦਾ ਹੈ। ਕੁਆਰ ਗੰਦਲ ਦਾ ਜਨਮ ਉੱਤਰੀ ਅਫਰੀਕਾ ਵਿਚ ਹੋਇਆ ਸੀ ਅਤੇ ਅੱਜ ਇਸ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਦੁਨੀਆ ਦੇ ਹਰੇਕ ਕੋਨੇ ਵਿਚ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ। ਕੁਆਰ ਗੰਦਲ ਵਿਚ ਅਜਿਹੀ ਔਸ਼ਧੀ ਹੈ ਜੋ ਕਿ ਪੂਰੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਕੁਦਰਤੀ ਹੈ। ਕੁਆਰ ਗੰਦਲ ਵਿਚ ਜ਼ਰੂਰੀ ਵਿਟਾਮਿਨ, ਖਣਿਜ ਪਦਾਰਥ ਅਤੇ ਪ੍ਰੋਟੀਨ ਹੁੰਦੇ ਹਨ। ਕੁਆਰ ਗੰਦਲ ਨੂੰ "he 8erb of 9mmortality ਵੀ ਕਿਹਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ। ਕੁਆਰ ਗੰਦਲ ਦੁਨੀਆ ਦੇ ਸਭ ਤੋਂ ਪੁਰਾਣੇ ਪੌਦਿਆਂ ਵਿਚੋਂ ਮੰਨਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ। ਕੁਆਰ ਗੰਦਲ ਸਿਹਤ ਪੱਖੋਂ ਬਹੁਤ ਹੀ ਲਾਭਦਾਇਕ ਹੈ ਅਤੇ ਚੀਨ ਦੇ ਲੋਕਾਂ ਵਲੋਂ ਇਸ ਨੂੰ ਵੀ 8armonious Remedy ਕਿਹਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ। ਕੁਆਰ ਗੰਦਲ ਦੀ ਸਭ ਤੋਂ ਜ਼ਿਆਦਾ ਵਰਤੋਂ ਵਿਚ ਆਉਣ ਵਾਲੀ ਕਿਸਮ ਬਾਰਬਾਡੇਨਿਸ ਹੈ। ਕੁਆਰ ਗੰਦਲ ਦੇ ਪੌਦੇ ਨੂੰ ਧੁੱਪ ਵਿਚ ਰੱਖਣਾ ਪੈਂਦਾ ਹੈ। ਕੁਆਰ ਗੰਦਲ ਦੇ ਪੌਦੇ ਨੂੰ ਗਮਲੇ ਵਿਚ ਵੀ ਲਗਾਇਆ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ, ਕਿਉਂਕਿ ਇਸ ਨੂੰ ਜ਼ਿਆਦਾ ਪਾਣੀ ਦੀ ਜ਼ਰੂਰਤ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦੀ। ਕੁਆਰ ਗੰਦਲ ਖੁਸ਼ਕ ਤੇ ਮਾੜੀ ਮਿੱਟੀ ਵਿਚ ਵੀ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ। ਕੁਆਰ ਗੰਦਲ ਦਾ ਪ੍ਰਯੋਗ ਗੁੱਦੇ ਦੇ ਰੂਪ ਵਿਚ ਵਰਤਣ ਲਈ ਟਾਹਣੀ ਦਾ ਉਪਰਲਾ ਛਿਲਕਾ ਲਾਹ ਦਿਓ। ਛਿਲਕਾ ਉਤਾਰਨ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਉਸ ਵਿਚੋਂ ਇਕ ਚਿੱਟੇ ਰੰਗ ਦਾ ਪਦਾਰਥ ਨਿਕਲਦਾ ਹੈ, ਜਿਸ ਨੂੰ ਅਸੀਂ ਗੁੱਦਾ ਕਹਿੰਦੇ ਹਾਂ। ਕੁਆਰ ਗੰਦਲ ਨੂੰ ਜੂਸ ਦੇ ਰੂਪ ਵਿਚ ਵਰਤਣ ਲਈ ਟਾਹਣੀ ਨੂੰ ਨਿਚੋੜ ਕੇ ਜੋ ਰਸ ਨਿਕਲਦਾ ਹੈ, ਉਸ ਦਾ ਪ੍ਰਯੋਗ ਜੂਸ ਦੇ ਰੂਪ ਵਿਚ ਹੋ ਸਕਦਾ ਹੈ। ਕੁਆਰ ਗੰਦਲ ਦੇ ਲਾਭ : 1. ਕੁਆਰ ਗੰਦਲ ਖੂਨ ਵਿਚੋਂ ਕੋਲੈਸਟ੍ਰੋਲ ਦੀ ਮਾਤਰਾ ਨੂੰ ਘਟਾ ਕੇ ਬਲੱਡ ਪ੍ਰੈਸ਼ਰ ਨੂੰ ਸੰਤੁਲਿਤ ਰੱਖਦਾ ਹੈ। 2. ਕੁਆਰ ਗੰਦਲ ਖੂਨ ਵਿਚ ਸ਼ੂਗਰ ਦੀ ਮਾਤਰਾ ਨੂੰ ਸੰਤੁਲਿਤ ਰੱਖਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਟਰਾਈਗਲਿਸਰਾਈਜ਼ ਨੂੰ ਘਟਾਉਂਦਾ ਹੈ। ਸ਼ੂਗਰ ਰੋਗੀਆਂ ਲਈ ਬਹੁਤ ਲਾਭਦਾਇਕ ਹੈ। 3. ਜੇਕਰ ਇਸ ਦੇ ਰਸ ਦਾ ਸੇਵਨ ਕੀਤਾ ਜਾਵੇ ਤਾਂ ਕਬਜ਼ ਨੂੰ ਦੂਰ ਕੀਤਾ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ। 4. ਇਸ ਦੇ ਗੁੱਦੇ ਤੋਂ ਤਿਆਰ ਮਲ੍ਹਮ ਜ਼ਖ਼ਮਾਂ ਨੂੰ ਠੀਕ ਕਰਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਖਾਰਿਸ਼ ਲਈ ਵੀ ਇਕ ਘਰੇਲੂ ਦਵਾਈ ਹੈ। 5. ਕੁਆਰ ਗੰਦਲ ਚਮੜੀ ਨੂੰ ਮੁਲਾਇਮ ਤੇ ਤਰੋਤਾਜ਼ਾ ਰੱਖਦਾ ਹੈ.

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ਲਾਭਦਾਇਕ ਹੋ ਸਕਦੀ ਹੈ ''ਫੁੱਲਾਂ ਦੀ ਕਾਸ਼ਤ ''

ਪੰਜਾਬ ਦੇ ਕਿਸਾਨਾਂ ਨੂੰ 'ਫੁੱਲਾਂ ਦੀ ਕਾਸ਼ਤ' ਵੱਲ ਵੀ ਉਚੇਚਾ ਧਿਆਨ ਦੇਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ। ਫੁੱਲਾਂ ਦਾ ਵਪਾਰ ਵਿਸ਼ਵ ਪੱਧਰ ਤੇ ਹੰਦਾ ਹੈ।ਘਰੇਲੂ ਮੰਡੀਆਂ ਵਿੱਚ ਵੀ ਫੁੱਲਾਂ ਦੀ ਖਪਤ ਕਾਫੀ ਜ਼ਿਆਦਾ ਰਹਿੰਦੀ ਹੈ ਜਿਸ ਕਰ ਕੇ ਫੁੱਲਾਂ ਦੀ ਖੇਤੀ ਦੀਆਂ ਕਾਫੀ ਜ਼ਿਆਦਾ ਸੰਭਾਵਨਾਵਾਂ ਪੈਦਾ ਹੋ ਗਈਆਂ ਹਨ। ਪੰਜਾਬ ਦਾ ਪੌਣ ਪਾਣੀ ਫੁੱਲਾਂ ਦੀ ਕਾਸ਼ਤ ਲਈ ਬਹੁਤ ਅਨੁਕੂਲ ਹੋਣ ਕਰਕੇ ਪੰਜਾਬ ਦੇ ਹੋਰ ਕਿਸਾਨ ਵੀਰਾਂ ਨੂੰ ਫੁੱਲਾਂ ਦੀ ਕਾਸ਼ਤ ਜ਼ਰੂਰ ਕਰਨੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ। ਇਹ ਇੱਕ ਬਹੁਤ ਲਾਹੇਵੰਦ ਸੌਦਾ ਹੈ ਕਿਉਂਕਿ ਫੁੱਲਾਂ ਦੀ ਕਾਸ਼ਤ ਕਰ ਕੇ ਤਾਜੇ-ਫੁੱਲ, ਸੁਕਾਏ ਹੋਏ ਫੁੱਲ, ਫੁੱਲਾਂ ਦੇ ਬੀਜ਼, ਫੁੱਲਾਂ ਦੇ ਗੰਢੇ, ਟਿਸ਼ੂ ਕਲਚਰ ਰਾਹੀਂ ਤਿਆਰ ਜਾਂ ਗਮਲਿਆਂ ਵਿੱਚ ਵੀ ਫੁੱਲਾਂ ਦੇ ਪੌਦੇ ਤਿਆਰ ਕਰਕੇ ਵੇਚੇ ਜਾ ਸਕਦੇ ਹਨ। ਫੁੱਲਾਂ ਤੋਂ ਤਿਆਰ ਕੀਤਾ ਇਤਰ ਵੀ ਬਹੁਤ ਮਹਿੰਗਾ ਵਿਕਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਚੌਖਾ ਮੁਨਾਫ਼ਾ ਦੇ ਦਿੰਦਾ ਹੈ। ਪੰਜਾਬ ਵਿੱਚ ਪੈਦਾ ਕੀਤੇ ਹੋਏ ਫੁੱਲਾਂ ਦੇ ਬੀਜ਼ ਹੋਰਨਾਂ ਦੇਸ਼ਾਂ ਵਿੱਚ ਭੇਜੇ ਜਾਂਦੇ ਹਨ।

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ਸਿਹਤਮੰਦ ਰਹਿਣ ਲਈ ਰੋਜ਼ ਖਾਓ ਸੇਬ, ਸੰਤਰਾ ਤੇ ਪਿਆਜ਼

ਜੇਕਰ ਤੁਸੀਂ ਚਾਹੁੰਦੇ ਹੋ ਕਿ ਤੁਸੀਂ ਸਿਹਤਮੰਦ ਰਹੋ ਤਾਂ ਰੋਜ਼ ਸੇਬ, ਸੰਤਰਾ ਅਤੇ ਪਿਆਜ਼ ਖਾਓ। ਤੁਸੀਂ ਉਸ ਹਰ ਬੀਮਾਰੀ ਤੋਂ ਮੁਕਤ ਹੋ ਰਹੋਗੇ ਜੋ ਖੂਨ ਦੇ ਥੱਕੇ ਹੋਣ ਕਾਰਨ ਹੁੰਦੀ ਹੈ। ਤੁਹਾਡੀ ਰੋਜ਼ਾਨਾ ਇਕ ਸੇਬ ਅਤੇ ਇਕ ਸੰਤਰੇ ਦੀ ਆਦਤ ਹੈ ਤਾਂ ਖੂਨ ਦੇ ਥੱਕੇ ਜੰਮਣ ਦੀ ਬੀਮਾਰੀ ਤੋਂ ਤੁਸੀਂ ਮੁਕਤ ਹੋ ਜਾਓਗੇ। ਇਕ ਖਬਰ ਮੁਤਾਬਕ ਹਾਰਵਰਡ ਮੈਡੀਕਲ ਸਕੂਲ ਦੇ ਇਕ ਦਲ ਨੇ ਪਾਇਆ ਕਿ ਸੇਬ, ਸੰਤਰਾ ਅਤੇ ਪਿਆਜ਼ 'ਚ ਰੂਟੀਨ ਨਾਮਕ ਰਸਾਇਣ ਧਮਨੀਆਂ ਅਤੇ ਸ਼ਿਰਾਵਾਂ 'ਚ ਖੂਨ ਦੇ ਥੱਕੇ ਜੰਮਣ ਤੋਂ ਰੋਕ ਸਕਦਾ ਹੈ। ਉਨ੍ਹਾਂ ਦਾ ਮੰਨਣਾ ਹੈ ਕਿ ਰੂਟੀਨ ਕਾਲੀ ਅਤੇ ਹਰੀ ਚਾਹ 'ਚ ਵੀ ਹੋ ਸਕਦਾ ਹੈ। ਇਸਦਾ ਭਵਿੱਖ 'ਚ ਦਿਲ ਦਾ ਦੌਰਾ ਪੈਣ ਤੋਂ ਬਚਾਉਣ ਲਈ ਇਲਾਜ 'ਚ ਇਸਤੇਮਾਲ ਹੋ ਸਕਦਾ ਹੈ। ਸ਼ੋਧਕਰਤਾਵਾਂ ਨੇ ਪਾਇਆ ਕਿ ਰੂਟੀਨ ਰਸਾਇਣ ਨੇ ਉਸ ਖਤਰਨਾਕ ਅੰਜਾਇਮ ਨੂੰ ਰੋਕਣ 'ਚ ਮਦਦ ਕੀਤੀ ਜਿਸ ਕਾਰਨ ਖੂਨ ਦਾ ਥੱਕਾ ਜੰਮਦਾ ਹੈ। ਪ੍ਰੋਟੀਨ ਡਾਇਸਲਫਾਇਡ ਆਈਸੋਮਰੇਜ (ਪੀ. ਡੀ. ਆਈ.) ਨਾਮਕ ਦਾ ਇਹ ਅੰਜਾਇਮ ਬੇਹੱਦ ਤੇਜ਼ੀ ਨਾਲ ਅਸਰ ਕਰਦਾ ਹੈ ਜਿਸ ਨਾਲ ਧਮਨੀਆਂ ਅਤੇ ਸ਼ਿਰਾਵਾਂ 'ਚ ਖੂਨ ਦਾ ਥੱਕਾ ਜੰਮਦਾ ਹੈ। ਵਿਗਿਆਨਿਕਾਂ ਨੇ ਕੰਪਿਊਟਰ 'ਤੇ ਵਿਗਿਆਨਿਕ ਮਾਡਲਾਂ ਦਾ ਇਸਤੇਮਾਲ ਕਰਦੇ ਹੋਏ ਪੀ. ਡੀ. ਆਈ. ਨੂੰ ਰੋਕਣ ਲਈ ਰੂਟੀਨ ਸਮੇਤ 500 ਵੱਖ-ਵੱਖ ਰਸਾਇਣਾਂ ਦੀ ਸਮਰੱਥਾ ਦੀ ਜਾਂਚ ਕੀਤੀ। ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੇ ਰੂਟੀਨ ਨੂੰ ਸਭ ਤੋਂ ਵੱਧ ਕਾਰਗਰ ਪਾਇਆ।

ਵਿਗਿਆਨੀਆਂ ਨੇ ਲੱਭਿਆ ਬਿਨਾਂ ਖਾਧੇ ਜਿਊਂਦਾ ਰਹਿਣ ਵਾਲਾ ਜੀਵਾਣੂ

ਸਾਡੇ ਲਈ ਇਕ ਦਿਨ ਭੁੱਖਾ ਰਹਿਣਾ ਕਿੰਨਾ ਮੁਸ਼ਕਿਲ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਪਰ ਕੋਈ ਅਜਿਹਾ ਵੀ ਹੈ ਜਿਸਨੇ ਪਿਛਲੇ 8.6 ਕਰੋੜ ਸਾਲਾਂ ਤੋਂ ਕੁਝ ਵੀ ਨਹੀਂ ਖਾਧਾ ਹੈ। ਦਰਅਸਲ, ਵਿਗਿਆਨੀਆਂ ਨੇ ਪ੍ਰਸ਼ਾਂਤ ਮਹਾਸਾਗਰ ਦੇ ਤਲ ਵਿਚ ਕੁਝ ਅਜਿਹੇ ਜੀਵਾਣੂ ਲੱਭੇ ਹਨ ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਜਿਊਂਦੇ ਰਹਿਣ ਲਈ ਭੋਜਨ ਦੀ ਲੋੜ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦੀ। ਵਿਗਿਆਨੀਆਂ ਨੇ ਪ੍ਰਸ਼ਾਂਤ ਗ੍ਰੇ ਦੇ ਤਲ ਵਿਚ ਇਕ ਨਰਮ ਲਾਲ ਕਲੇਅ ਵਿਚੋਂ ਇਸ ਜੀਵਾਣੂ ਨੂੰ ਲੱਭਿਆ ਹੈ। ਇਸ ਜੀਵਾਣੂ ਨੂੰ ਜਿਊਂਦਾ ਰਹਿਣ ਲਈ ਬਹੁਤ ਘੱਟ ਮਾਤਰਾ ਵਿਚ ਆਕਸੀਜਨ ਅਤੇ ਪੋਸ਼ਕਾਂ ਦੀ ਲੋੜ ਹੁੰਦੀ ਹੈ। ਪ੍ਰਸ਼ਾਂਤ ਗ੍ਰੇ ਉਹ ਥਾਂ ਹੈ ਜਿਥੇ ਮਹਾਸਾਗਰ ਵਿਚ ਡਿੱਗਣ ਵਾਲਾ ਸਾਰਾ ਅਘੁਲਣਸ਼ੀਲ ਕਚਰਾ ਜਮ੍ਹਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ। ਖੋਜਕਾਰਾਂ ਦਾ ਮੰਨਣਾ ਹੈ ਕਿ ਇਨ੍ਹਾਂ ਜੀਵਾਣੂਆਂ ਨੂੰ ਕਿਸੇ ਨੇ ਪਿਛਲੇ 8.6 ਕਰੋੜ ਸਾਲਾਂ ਵਿਚ ਹੱਥ ਵੀ ਨਹੀਂ ਲਗਾਇਆ ਹੈ। ਇਹ ਡਾਇਨਾਸੋਰ ਦੇ ਲਾਪਤਾ ਹੋਣ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਤੋਂ ਉਥੇ ਮੌਜੂਦ ਹਨ।

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ਦੇਰ ਰਾਤ ਖਾਣ ਨਾਲ ਵਧ ਸਕਦੈ ਮੋਟਾਪਾ

ਇਹ ਪਤਾ ਹੈ ਕਿ ਫੈਟ ਯੁਕਤ ਭੋਜਨ ਕਰਨ ਨਾਲ ਤੁਸੀਂ ਮੋਟੇ ਹੋ ਸਕਦੇ ਹੋ। ਹੁਣ ਭਾਰਤੀ ਖੋਜਕਾਰਾਂ ਦੀ ਅਗਵਾਈ ਵਿਚ ਕੀਤੇ ਗਏ ਇਕ ਅਧਿਐਨ ਵਿਚ ਦਾਅਵਾ ਕੀਤਾ ਗਿਆ ਹੈ ਕਿ ਰਾਤ ਨੂੰ ਦੇਰ ਨਾਲ ਭੋਜਨ ਕਰਨ ਨਾਲ ਵੀ ਤੁਹਾਡਾ ਭਾਰ ਵਧ ਸਕਦਾ ਹੈ। ਕੈਲੀਫੋਰਨੀਆ ਵਿਚ ਸਾਲਕ ਇੰਸਟੀਚਿਊਟ ਫਾਰ ਬਾਇਓਲਾਜੀਕਲ ਸਟਡੀਜ਼ ਨੇ ਪਾਇਆ ਕਿ ਇੰਟਰਨੈੱਟ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਕਰਦੇ ਸਮੇਂ ਜਾਂ ਦੇਰ ਰਾਤ ਫਿਲਮ ਦੇਖਣ ਦੌਰਾਨ ਜਦੋਂ ਅਸੀਂ ਖਾਂਦੇ ਹਾਂ ਤਾਂ ਇਸ ਨਾਲ ਮੋਟਾਪਾ ਵਧਣ ਦੀ ਸੰਭਾਵਨਾ ਹੁੰਦੀ ਹੈ। ਅਧਿਐਨ ਕਰਨ ਵਾਲੇ ਸਹਾਇਕ ਪ੍ਰੋਫੈਸਰ ਡਾ. ਸਚਿਤਾਨੰਦਨ ਪਾਂਡਾ ਨੇ ਕਿਹਾ ਕਿ ਦਿਨ ਦੇ ਕੁਝ ਸਮੇਂ ਅੰਤੜੀ ਅਤੇ ਮਾਸਪੇਸ਼ੀਆਂ ਕੰਮ ਕਰਨ ਵਿਚ ਰੁੱਝੀਆਂ ਹੁੰਦੀਆਂ ਹਨ ਜਦਕਿ ਹੋਰ ਸਮੇਂ ਵਿਚ ਉਹ ਸੁਸਤ ਅਵਸਥਾ ਵਿਚ ਹੁੰਦੀਆਂ ਹਨ।

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यह बात एक अध्ययन में समाने आई

यदि कोई पुरूष या महिला रोज एक गिलास अनार का जूस पीता है, तो उसे पावर बढ़ाने के लिए किसी भी तरह के वियाग्रा की जरूरत नहीं है। यह बात एक अध्ययन में समाने आई है। इसमें कहा गया है कि अनार का जूस वियाग्रा की तरह सेक्स पावर बढ़ाने में सहायक होता है। रिसर्च के मुताबिक, अनार का जूस सेक्स की इच्छा को जगाने वाले हॉर्मोन टेस्टास्टेरॉन की मात्रा को बढ़ाता है। प्रतिदिन जूस पीने से यह मात्रा 16 से 30 फीसदी तक बढ़ जाती है। इतना ही नहीं सेक्स की इच्छा जागृत होने के साथ-साथ उस शख्स की मेमोरी और मूड भी ठीक रहता है। शोधकर्ताओं ने यह प्रयोग करीब 58 लोगों पर किया। इनकी उम्र 21 से 64 साल के बीच थी। इस लिहाज से अनार का जूस पुरुष और महिलाओं दोनों के लिए कारगर है। दोनों बराबर असरदार है। जबकि वियाग्रा जैसी मेडिसिन सिर्फ पुरूषों के लिए कारगर है। बताते चलें कि कुछ साल पहले भी अनार के जूस को लेकर एक रिसर्च किया था। इसमें भी पाया गया था कि यह फल दिल को स्वस्थ रखने और ब्लड सर्कुलेशन के लिए भी कारगर रहता है। इसका जूस पीने से नेगेटिव इमोशन में कमी और पॉजिटिव इमोशन में बढ़त होती है।

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